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Saturday, 4 November 2017

बेटी या बहू

🔷 सुजाता को लड़का हुआ, नॉर्मल डिलीवरी होने के कारण उसी दिन हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गई, घर में सभी बहुत खुश थे क्योंकी पहले एक तीन साल की लड़की थी, सासू जी बहू के आराम के लिए हाल के पास वाले कमरे में बिस्तर लगा रही थी।

🔶 बहू शाम को घर आ गई, बच्चे को देखने और सुजाता की खबर पूछने रिश्तेदार व पड़ोसी आने लगे, सासु माँ घर का सारा काम भी करती, सुजाता व बच्चे का ध्यान रखती और आनेवालों का स्वागत भी करती।

🔷 कहते हैं सभी एक जैसे नहीं होते, सभी अपनी अपनी सलाह सुजाता की सास को देकर जाते, सुजाता को सब अंदर सुनाई देता था, उसी समय एक पड़ोसी की पत्नी आई और कहने लगी, देखो वैसे तो हम डिलीवरी में पूरा मेवा "काजु,बदाम,पिस्ता सब डालकर लड्डू बनाते हैं पर अपनी बेटियों के लिए, अब बहु है तो थोड़ा कम ज्यादा भी चल जाता है, बादाम बहुत मंहंगी है इसलिए 500 ग्राम के बदले 150 ग्राम ले लेना और वैसे ही सभी मेवा थोड़ा थोड़ा कम कर देना और लड्डू कम न बने इसके लिए गेहूं का आटा ज्यादा ले लेना, सुजाता की सास सब सुनती रही अंदर सुजाता भी सब सुन रही थी, पड़ोसन चली गई, ससुर जी बोले " देखो में बाजार जा रहा हूँ तूम मुझे क्या लाना है लिखवा दो?

🔶 कोई चीज बाकी ना रहे, तभी सुजाता की सास ने सामान लिखवाया, हर चीज बेटी की डिलीवरी के समय से ज्यादा ही थी ससुर जी ने पूछा इस बार सभी सामान ज्यादा है क्या तूम भी लड्डू खाने वाली हो? तब सुजाता की सास बोली "सुनों जब बेटी को डिलिवरी आई थी तब हमारी परिस्थिति अच्छी नहीं थी और आवक भी कम थी तब आप अकेले कमाते थे अब बेटा भी कमाता है इसलिए मैं चाहती हूँ की बहू के समय, में वो सब चीजें बनाऊँ जो बेटी के समय नहीं कर पाई, क्या बहू हमारी बेटी नहीं है।

🔷 और सबसे बड़ी बात यह की बच्चा होते समय तकलीफ तो दोनों को एक सी ही होती है इसलिए मैंने बादाम ज्यादा लिखे हैं लड्डू में तो डालूंगी पर बाद में भी हलवा बनाकर खिलाउंगी, जिससे बहू को कमजोरी नहीं आये और बहू -पोता, हमेंशा स्वस्थ रहें!

🔶 सुजाता अंदर सबकुछ सुन रही थी और सोच रही थी में कितनी खुशकिस्मत हूँ। और थोड़ी देर बाद जब सासुजी रूम में आई तो सुजाता बोली "क्या मैं आपको मम्मीजी की जगह मम्मी कहूँ?

🔷 बस फिर क्या? दोनों की आँखों में आँसू थे।

Tuesday, 13 October 2015

बेटी से बहु ----समाज की हकीकत .


सभी माता-पिता, बहन-बेटियो और बहुओ के लिये है यह शिक्षाप्रद कथन.....! एक वकील साहब ने अपने बेटे का रिश्ता तय कर दिया। कुछ दिनों के वाद वकील साहब होने वाले समधी के घर गए, तो उन्होंने देखा कि होने वाली समधन खाना बना रही थीं।
सभी बच्चे और उनकी होने वाली बहु टीवी देख रही थी। वकील साहब ने चाय पी कुशल जाना और चले आये। 1 माह बाद वकील साहब समधी जी के घर दीपावली के त्यौहार के वाद फिर गए। उन्होंने फिर देखा की समधन जी झाड़ू लगा रहीं थी, बच्चे पड रहे थे, और उनकी होने वाली बहु सो रही थी। वकील साहब ने खाना खाया और चले आये।
कुछ दिन बाद वकील साहब किसी काम से एक बार फिर से होने वाले समधी जी के घर गए घर में जाकर देखा होने वाली समधन बर्तन साफ़ कर रही थी बच्चे टीवी देख रहे थे और उनकी होने वाली बहु खुद के हाथो में मेहंदी निकाल रहीं थी।
"20 दिन वाद वकील साहब ने लड़की वालों के यहाँ खबर पहुचाई कि मुझे ये रिश्ता मंजूर नही है"
→ कारण पूछने पर वकील साहब ने कहा की, "मै होने वाले समधी के घर तीन बार गया तीनो बार सिर्फ समधन जी ही घर के काम काज में ब्यस्त दिखीं। एक भी बार मुझे होने वाली बहू घर का काम काज करते हुए नही दिखी। "मुझे अपने बेटे के लिए एक बहू की आवश्यकता है किसी गुलदस्ते की नही जो किसी पॉट में सजाया जाये ।
इसलिये सभी माता-पिता को चाहिये की वह हमेशा इन छोटी छोटी बातो पर अवश्य ध्यान देवे।
1→ बेटी कितनी ही प्यारी क्यों न हो उससे घर के छोटे बड़े काम काज अवश्य कराना चाहिए।
2→समय-समय पर डाटना भी चाहिए जिससे ससुराल में ज्यादा काम पड़ने या डाट पड़ने पर उसके द्वारा गलत करने की कोशिश ना की जाये।
3→ अगर हमारे घर बेटी पैदा होती है, तो हमारी जिम्मेदारी बेटी से बहूँ बनाने की भी है। अगर हमने अपनी जिम्मेदारी ठीक तरह से नही निभाई और बेटी में बहु के संस्कार नही डाले तो इसकी सजा बेटी को तो मिलती है और माँ - बाप को मिलती है, "जिन्दगी भर गालियाँ"।
4→ हर किसी को सुन्दर, सुशील बहू तो चाहिए। लेकिन भाइयो, जब तक हम अपनी बेटियों में एक "अच्छी बहू के संस्कार नहीं डालेंगे, तो हमें संस्कारित बहू कहाँ से मिलेगी।
दोस्तों ये आज के समय की बहुत बड़ी हकीकत है जो शायद किसी को गलत भी लग सकती हे पर यही वास्तविकता हे और यही हर घर घर की कहानी भी हे आज के समय में एक बेटा या बेटी होने से माँ बाप उसकी हर इच्छा पूरी करते हे ये तो बहुत अच्छी बात हे पर साथ साथ में संस्कार देना भी अति आवश्यक हे ताकि आगे कभी कोई परेशानी न हो यदि मेरी बात आपके दिल को छुई हो तो जरूर अमल में लाये और यदि किसी को बुरी लगी हो तो में जोड़कर क्षमा ।
आगे क्या करना न करना ये आप पर हे।
             "आन्नद ही आन्नद "